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JAYA PRAKASH NARAYAN ANNIVERSARY- COMRADE HARBHAJAN SINGH SIDHU EXPRESS THEIR GRATITUDES TOWARDS LOK NAYAK JP ON 11th OCTOBER,2022

             JAYA PRAKASH NARAYAN ANNIVERSARY GREAT FREEDOM FIGHTER, LEGEND HARD CORE SOCIALIST, BHARAT RATAN, MAGSAYSAR AWARDEE WHO CHANGED THE POLITICAL SCENARIO OF THE NATION WITH HIS SLOGAN “Singhasan Khali Karo ki Janta aati hai.” JAYA PRAKASH NARAYAN MORE RELEVANT TODAY.   Mr. chair and friends. It is my proud privilege to be a part of today’s event, I express my hearty gratitudes to the organizers to provide me an  opportunity to offer my respectful tributes to the Vetern leader Jaya Prakash Narayan  on his birth anniversary and to express my views. Jaya prakash Narayan also known as  J.P. or Lok Nayak  a great freedom fighter, Sarvodaya Leader, Socialist who changed the country’s political scenario  through “ Sampurna Kranti” movement , an initiative against undemocratic rule of the then “Prime Minister Indira Gandhi with the slogan “ “ Singhasan Khali Karo, Ki Janta aati hai.””.  Which got tremendous response from all sections of the society. Jaya Prakash Narayan was
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समाजवादी समागम द्रारा राष्ट्रव्यापी अभियान हरभजन सिंह सिद्धू द्वारा आयोजित महासभा

समाजवादी समागम द्रारा राष्ट्रव्यापी अभियान  भारतीय सविधान , सार्वजानिक क्षेत्र बचाने , सांप्रदायिक सदभाव की रक्षा हेतु समस्त समाजवादी एवं समान विचार वाले नागरिको से एकजुद होने का आवाहन ” साथियो , भारत की स्वतंत्रता को 75 वर्ष पूर्ण हो गए है , स्वतंत्रता प्राप्ति में श्रम जीवी वर्ग , किसान , युवा , एवं   महिलाओ , समाज के हर वर्ग का सराहनीय योगदान रहा   है जिसके बल पर कभी भी सूर्यास्त न होने   वाले साम्राज्य को पराजित कर भारत एक स्वतंत्र , सार्वभौमिक   गणतंत्र बना जिसने संसदीय प्रजातंत्र कोअपनाया । भारत की आम जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप भारत के सविधान का निर्माण किया गया जो विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है , इसके अंतग्रत नागरिको के मौलिक अधिकार के साथ राज्य के   नीतिनिर्देशक तत्वों का भी उल्लेख है जो राष्ट्र की भावी दिशा प्रस्तुत करते है । कालांतर से समाजवादी नेताओ के निरन्तर   प्रयास से “ संविधान ” की प्रस्तावना में “ समाजवादी ” एवं “ धर्मनिरपेक्ष ” शब्दों को भी अंगीकृत किया गया । स्वतंत्रता   संग्राम एवं आजादी के बाद समाज के श्रम जीवी , कमजोर (वर्ग) , महिला व अन्य सवेंदनशील वर्ग के ह